जग से निराला करौली शंकर महादेव दरबार
ॐ नमः शिवाय
करौली शंकर महादेव की जय !!!
सभी पाठकों को जय बाबा की, जय गुरु माता
की !!!
शुभ बसंत पंचमी
हैप्पी
बर्थडे बाबा जी ...
सच कहूँ तो दरबार से जुड़ने के बाद से
ही अक्सर मैं अकेले में यह सोचता था कि मैंने ऐसा कौन सा पुनीत कार्य किया है, जिसके
फलस्वरूप मैं दरबार तक पहुंच पाया? इस दरबार में आना, और यहाँ से जुड़ पाना तो बहुत
से संतों, बुद्धिजीवियों, धनाढ्यों और बड़भागियों को भी सुलभ नहीं है। फिर मुझ पर ऐसी
दैवीय कृपा कैसे हुई, किन सुकर्मों का मुझे और मेरे परिवार को यह अनूठा फल मिला, इसका
उत्तर ढूंढने में मैं पूर्णतः असमर्थ था।
परन्तु परम आदरणीय गुरु जी कहते हैं ना
कि, हम लोग दरबार नहीं पहुंचे हैं; परम पूज्यनीय बाबा और गुरु माता जी ही हम सभी को
दरबार लेकर आये है। सही भी है, बिना नेत्रों (ज्ञान चक्षु) वाला क्या ही रास्ता और
मंज़िल (मुक्ति का द्वार) देख पायेगा? हम सभी को बाबा जी और गुरु माता जी ही एक तरह
से हाथ पकड़ कर ले आये हैं हमारे कष्टों का निवारण करने के लिए। हमारे प्रति अपने ह्रदय
में ऐसी उदारता, करुणा और ममता सिर्फ बाबा जी और गुरु माता जी के लिए ही संभव है।
जब-जब मैं, माही बहन जी, भाई संदीप राजपूत
जी, भाई विशाल चौरसिया जी, डॉ. मोहन कमल जी तथा अन्य भक्तों को दरबार की सेवा में अपने-अपने
माध्यम से तत्पर रहते देखता हूँ तो मेरा भी बहुत मन होता है कि मैं भी किसी तरह से
दरबार के काम आ सकूँ| दरबार की प्रेरणा से ही मैं यह ब्लॉग लेकर आपके सामने प्रस्तुत
हूँ| इस ब्लॉग में मेरे मन के भाव हैं, आशा है आप भी स्वयं को इन अनुभूतियों से जुड़ा
हुआ पाएंगे|
जहाँ तक मैं
जीवन को समझ पाया
हूँ, जीवन का एक
महत्वपूर्ण उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है|
लेकिन यह इतना सुलभ
नहीं है| आम जीवन
तो वैसे ही अनेकों
समस्याओं, रोगों, और बाधाओं से
ग्रसित रहता है तो
व्यक्ति कहाँ ही मोक्ष
के विषय में सोच
पाता है| परन्तु दरबार
से जुड़ने के बाद मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह दरबार
ही मुक्ति का मार्ग है
और यहीं से मोक्ष
का द्वार भी मिलेगा|
लेकिन अब प्रश्न है
कि यह सब कैसे
संभव होगा? परम श्रद्धेय गुरु
जी कहते हैं कि
जहाँ पूर्ण गुरु का वास
होता है, सिर्फ वहीं
पर शिव-शक्ति का
भी वास होता है|
शिव-शक्ति के युगल आशीर्वाद
से ही पूर्वज मुक्त
हो सकते हैं| पूर्वजों
की मुक्ति के बाद ही
स्थूल शरीर के कर्म
भोग, रोग, और समस्याओं
का निराकरण संभव है| और
जब यह सब समस्याएं
समाप्त हो जाती हैं,
तब गुरु के आशीर्वाद
और साधना से मोक्ष पाना
संभव हो पाता है|
तो सबसे पहले तो
हमें पूर्ण गुरु की शरण
में जाना होगा| हम
सभी कितने ही सौभाग्यशाली हैं
कि हमें तो बाबा
जी और गुरु माता
जी के रूप में
दो-दो पूर्ण गुरु
मिले हैं, और मार्ग
दर्शन के लिए महादेव
रुपी परम श्रद्धेय गुरु
जी मिले हैं| तभी
तो इस दरबार में
सदैव ही शिव-शक्ति
और अन्यान्य दैवीय शक्तियों का वास रहता
है|
दरबार परिसर में प्रवेश करते
ही एक विशेष अनुभूति
होती है| ऐसा लगता
है कि कोई दिव्य
शक्ति आपको आध्यात्म की
राह पर खींच रही
है| और हम बरबस
ही बाबा, माँ के जयकारे
लगाते हुए उस राह
पर चल पड़ते हैं|
यह वाक्-सिद्धि का
दरबार है, आंखों वाला
दरबार है, यहाँ कुछ
भी नहीं छिप सकता,
सत्य सामने आकर ही रहता
है, शरीर के वह
सभी कष्ट भी नष्ट
होने के लिए सामने
आते हैं, जिनकी हमें
अनुभूति भी नहीं होती
है|
संकल्प मात्र से ही हम
अपनी समस्त समस्याओं को जड़ से
समाप्त कर सकते हैं|
यहाँ संकल्प का अर्थ यह
है जब आपके पास
और कोई विकल्प न
शेष हो, सिर्फ दरबार
ही आसरा हो| बाबा
जी, गुरुमाता जी, गुरु जी
और दरबार के प्रति मन
में अटूट श्रद्धा और
विश्वास हो, सनातन धर्म
मैं आस्था हो, तभी हमारा
संकल्प प्रार्थना में परिवर्तित होता
है, जिसे भगवान् शिव
और माँ कामाख्या अवश्य
पूर्ण करते हैं| जिसके
फलस्वरूप आज अनेकों परिवार
सुखपूर्वक और आनंद से
अपना जीवन यापन कर
रहे हैं और अपने-अपने कर्तव्यों का
निर्वाहन कर रहे हैं|
यह सब दरबार की
कृपा से ही संभव
हो सकता है| मेरा
पूर्ण विश्वास है कि दरबार
के माध्यम से ही, "सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥" श्लोक चिरतार्थ हो सकता है|
मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपको मेरे यह लेख पसंद आया होगा, अपना प्रोत्साहन रुपी आशीर्वाद मुझ पर बनाये रखियेगा जिससे कि मैं नियमित समयांतराल पर करौली शंकर महादेव की महिमा के विषय मैं और भी लिख सकूँ|
आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद| 🙏🙏
(नोट: सभी विचार स्वयं के, तथा दरबार के अन्य भक्तों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं।)
– लेखक
ड़ॉ. निखिल गोविल
Comments
Post a Comment